दोस्त की मम्मी ने मेरी प्यासी मिटाई

हेलो दोस्तों मेरा नाम संदीप है और मैं दिल्ली का रहने वाला हु। मेरी उम्र २८ साल है मेरी शादी हो चुकी है। लेकिन कुछ महीने पहले किसी निजी कारण के वजह से तलाक भी हो गया। अब मैं दिल्ली में अपने घर में रहता हु और साथ में जॉब भी करता हु। आज की कहानी मेरे और मेरे एक ख़ास दोस्त की मम्मी के बीच के नाजायज़ रिश्ते के बारे में है। 

मेरा तलाक कुछ महीने पहले हुए था और मैं बिलकुल अकेला पड़ गया था। उस वक़्त मेरे दोस्तों ने काफी सहारा दिया। सबसे ज़्यादा मदत की मेरा सबसे ख़ास दोस्त राज ने। वो मेरा बचपन का यार है और हम दोनों की दोस्ती को २५ साल से ऊपर हो गए। राज पढ़ने के लिए कनाडा गया था। हमारी अक्सर फेसबुक पर बात होती थी। जब उससे पता चला मेरा तलाक हुआ तो उससे काफी दुःख हुआ। कनाडा में राज को काफी साल हो गए थे वो वही जॉब भी कर रहा था। इंडिया में उसका आना जाने काफी कम था।

एक दिन मुझे राज का कॉल आया उसने कहामेरी माँ की तबियत बहुत ज़्यादा खराब है

मैंने अफ़सोस होकर कहाक्या हुआ? सब ठीक है

राज ने कहातू ऐसा कर घर चले जा, नए वाले,,मैं तुझे एड्रेस सेंड करता हु, वह जाकर उनकी हालत का पता करलो

मैंने कहाठीक है मैं वह जाकर वीडियो कॉल करूँगा और साथ में तेरी मम्मी को भी दिखा दूंगा

थोड़ी देर बाद राज का कॉल आया और मैंने थोड़ा सामन पैक कर लिया। राज का नया घर मुझसे काफी दूर था इसलिए टैक्सी बुक करनी पड़ी। अब मैं उसके घर पहुंचा तो राज की मम्मी सोफे पर लेते हुए थे। वो मुझे देखकर एकदम से खड़े हो गए। मैंने तुरंत उनके पेअर छुए और पूछाआप कैसे हो

उन्होंने कहामैं बेहतर हु, तुम यही बैठ जाओ

हम दोनों साथ में पानी पिया और यहाँ वह की बातें करने लग गए। लेकिन रात के बजे गए थे। 

मैंने राज की मम्मी से कहाखाना बना दू मैं

उन्होंने कहानहीं, मैंने तो खाना बना भी लिया

मैंने कहाठीक है मैं बना लेता हु अपने लिए कुछ भी

राज की मम्मी ने हस्ते हुए कहाखिचड़ी रखी है, चाहो तो वो खालो, अचार भी है साथ में अच्छी लगेगी, बस गरम कर लेना

यह कहकर वो कमरे में चले गए। मैंने अपना खाना गरम किया और टेबल पर लाकर रख दिया। साथ में मैंने अपनी दारु की बोतल भी रख ली। टीवी चलायी और मैं आराम से एन्जॉय कर रहा था। इतने में ही मुझे कुछ गिरने की आवाज आयी। मैं भागकर ऊपर गया तोः राज की मम्मी कुछ धुंध रही थी। 

मैंने कहाआंटी क्या चाहिए, मुझे बताओ

राज की मम्मी ने कहामुझे बाम चाहिए, पता नहीं मैंने कहा रख दी

मैंने कहाआप बेड पर लेट जाओ, मैं ढूंढता हु” 

मैं बाम ढूढ़ा और सीधा राज की मम्मी के सिरहाने के पास बैठ गया। मैं धीरे धीरे उनके सर पर बाम लगा रहा था। मैं दारु के बहुत गहरे नशे में था और इस वक़्त अश्लीलता साफ़ मेरी आँखों में थी। राज की मम्मी मेरे सामने लेती हुई थी, बिना कहे मैं उनके मुलायम पैर दबाने लग गया। 

राज की मम्मी ने कहासंदीप तुम परेशान मत हो, जाओ सोजाओ

लेकिन मैंने कुछ कहा नहीं और उनके पैर दबाता रहा। थोड़ी देर बाद उन्हें भी सुकून मिल रहा था तो उन्होंने कुछ भी नहीं कहा। 

मैंने उनसे पूछाआपको वैसे हुआ क्या था

राज की मम्मी ने कहापिछले दिनों से चक्कर रहे थे, शरीर में बेहिसाब दर्द, समाज ही नहीं रहा क्या करू, सोच रही हु की राज के पास चली जाऊ। 

मैंने कहाहां, आप वह चले जाओ, वो भी आपको बुला रहा था

उन्होंने कहाहां बस अगले महीने पक्का चली जाऊँगी

अब मुझे उनकी मुलायम और गोर पैरो से शरीर में अलग सी हलचल हो रही थी। मैं राज की मम्मी के पैर अच्छे से दबा रहा था। 

मैंने उनसे पूछाकैसा लग रहा है

उन्होंने कहाबहुत सुकून, संदीप तू मस्सगे वाला बन जा, अच्छी कमाई होगी

मैंने हस्ते हुए कहानहीं, मैं तो बस आपके पैरो को सुकून देने की कोशिश कर रहा हु। 

आंटी के हाव भाव में कोई कामुकता नहीं। उनके गोरे और मुलायम पैरो को देखकर मुझसे रहा नहीं जा रहा था। 

अचानक आंटी ने पूछाअरे तेरी बीवी का क्या हुआ

इतने में ही मैं भावुक हो गया और आँखों से आंसू निकलने लग गए। उन्होंने मेरी तरफ देखा और मुझे सीने से लगा लिया। 

मैंने कहाअब मैं अकेला हु और खुश हु

उन्होंने मेरे आंसू पोछे और कहातुम बहुत अच्छे इंसान हो

मैंने कहाचलो मैं आपकी घुटने की मालिश कर देता हु

बिना किसी तकलीफ वो लेट गयी और मैंने उनके कपडे थोड़े ऊपर कर दिए। वाह क्या नज़ारा था वो। सच्ची उनकी टांगें बहुत ही गज़ब की थी। मैंने ऐसे करते करते उनकी पैंटी तक पहुँच गया। एक वक़्त ऐसा था की मेरी उँगलियाँ उनकी पैंटी के ऊपर थी। लेकिन उन्होंने कोई भी विरोध नहीं किया। उनकी मोती और रसीली चुत को देखकर मेरा लंड बिलकुल तन गया था। मैंने धीरे से उनकी पैंटी उतारी और राज की मम्मी ने अपनी आँखें बंद कर ली। 

मैं समाज गया यह चुदने के लिए तैयार है। कुछ देर बाद मैंने उनकी चुत को गीला कर दिया। उनकी चुत का रस निकलने शुरू हुआ। लगभग मिनट बाद मैं ऊपर उठा और उनके किश करने लगा।  वो भी आहें भरी जा रही थी क्यूंकि मैंने एक ऊँगली उनकी चुत में घुसा राखी थी। 

समज नहीं रहा था इतना जोश कहा से रहा था। उन्होंने मेरे मुँह को फिर से अपनी चुत के पास रख दिया और मैं ऊँगली दाल डालकर चुत को चाट रहा था। मुझसे रहा नहीं जा रहा मैंने तुरंत अपने सारे कपडे निकाल दिए। राज की मम्मी मेरे लंड को एक रंडी की नज़रों से देख रही थी। वो अपनी टांगें और फैला रही थी और इशारा दे रही थी की चुत को जमकर चोदना है। मैं उनके ऊपर लेट गया और चूचियों को काटने लगा। वो आह्ह्हह्ह्ह्ह  ुह्ह्ह्ह करने लगी और एक तरफ मैं अपने लंड को रगड़ रहा था। 

आंटी ने कहाबस संदीप, अब घुसा दो

मैंने बिना देरी के अपने लंड को घुसा दिया। दोस्तों मैं नशे की हालत में था लेकिन एक तरफ मैं उनकी चुत में अपना लंड पेल रहा था दूसरी तरफ उनकी होटों को काट रहा था साथ में उनकी चूचियों को ज़ोर ज़ोर से दबा रहा था। चुदाई की ख़ुशी आंटी के चेहरे पर साफ़ दिख रही थी। १५ मिनट की चुदाई के बाद मैंने सारा रस आंटी के चुत में निकाल दिया। अब तक आंटी थक चुकी थी क्यूंकि वो वैसे ही बीमार थी। मैं खड़ा हुआ तो मेरा लंड झूल रहा था। जिससे देखकर वो है रही थी। उन्होंने कम्बल निकला और हम दोनों नंगे ही सो गए। 

अगले दिन उन्होंने जाने के लिए कहा, लेकिन मैं गया था। दिन के अंदर मैं राज की माँ को बार पेला और एक बार गांड भी मारी। दोस्तों मुझे अकेलेपन का साथ मिल गया और राज की मम्मी को एक अच्छा साथी।  

राज की मम्मी अभी भी यही रहती है मेरी वजह से मैं आये तीसरे दिन उनके घर जाते रहता हु।  

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