मेट्रो में मिली चुडासी भाभी की प्यासी मिटाई

दोस्तों बारिश का मौसम बहुत अच्छे से चूका है और असली चुदाई का मज़ा तो यही मौसम में है। मैं आज आपको एक सच्ची घटना के बारे में बताता हु जो पिछले बारिश के मौसम की है। मेरा नाम आनंद है और मैं मुंबई रहने वाला हु। मेरी उम्र २३ साल है और मैं एक ऑफिस में काम कर रहा हु। अब तक सिर्फ मैंने अपनी गर्लफ्रेंड के साथ सेक्स किया है लेकिन मैंने कभी किसी भाभी और आंटी के साथ सेक्स नहीं किया। वैसे तो मुझे जवान लड़कियों से ज़्यादा आंटी और भाभी का शौक है।

कहानी ऐसे शुरू होती है, मैं रोज़ लोकल ट्रैन से जाता हु। लेकिन बारिश काफी थी और मुझे मेट्रो से घर जाना ही पड़ा। जैसे ही मेट्रो स्टेशन मैं पहुंचा पुरे स्टेशन पर ज़्यादा कोई नहीं है। मेट्रो आयी और मैं तुरंत अंदर घुसा, जैसे ही मेट्रो चलने वाली थी, उतने में ही एक भाभी जल्दी से अंदर घुस गयी और वो एकदम से मेरे बाजू में खड़ी हो गयी। मैं उस भाभी को देखता ही रह गया, वो बिलकुल भीगी हुई थी और दिखने में काफी ही खूबसूरत। कोई मेकअप कुछ नहीं लेकिन सादगी में भी कोई जवाब नहीं था। उस वक़्त मैं सिंगल था, लेकिन इस भाभी को देखते ही मुझे कुछ अलग सा फील हुआ। मैं धीरे से उनके पीछे गया और अचानक स्टॉप गया। काफी लोग अंदर घुसे तो भाभी आगे के तरफ बढ़ी और मैं भी उनके पीछे चला गया। मेरा लंड बिलकुल उनकी गांड से सत्ता हुआ था। भाभी कुछ नहीं कह रही थी, लेकिन मुझे काफी मज़ा नहीं रहा। मैं धीरे धीरे अपने लंड को उनकी गांड से सेहला रहा था। काफी स्टॉप निकलते गए और मैं बिलकुल मदहोश था। 

कुछ देर बाद भीड़ काम हो गयी और भाभी सीट पर जाकर बैठ गयी। जिस सीट पर जाकर वो बैठी, मैं उसके सामने जाकर खड़ा हो गय।  मैं उन्हें छुप छुपकर देख रहा था। जैसे ही मौका मिलता मैं उन्हें टच भी कर लेता। काफी वक़्त तक ऐसा ही चलता रहा। कुछ देर बाद मेरा स्टॉप आया लेकिन मैं उतरा नहीं। अगले ही स्टॉप पर वो उतर गयी, मैं भी साथ में पीछे पीछे चला गया। स्टेशन से उतारकर उसने रिक्शा किया, फिर मैं फॉलो किया। बारिश तेज़ हो गयी और रास्ते पर कोई भी नहीं था। 

अचानक भाभी ने मुड़कर कहामेरे पीछे मत आओ, यहाँ सब मुझे और मेरी फॅमिली को जानते है, तुम पिट जाओगे

मैंने कहाआप ही पितलो,,कोई दिक्कत नहीं

भाभी ने कहापागलों वाली हरकतें मत करो

मैंने हस्ते हुए कहातुम्हारी खूबसूरती ने मुझे पागल कर दिया, अपना नंबर दो वर्ण घर तक जाऊंगा और पीटकर भी घर के सामने ही पड़ा रहूँगा

भाभी ने कहाजल्दी लिखो

मैंने उनका नंबर अपने फ़ोन में सेव कर लिया और वो जल्दी से चली गयी। कुछ देर बाद मैंने उन्हें मिस कॉल दिया। उन्होंने फ़ोन करकर कहा, गलती से भी तुम कॉल मत करना, मैं तुम्हे खुद कॉल करुँगी। अब दिन बीत रहे थे, लेकिन भाभी का कॉल नहीं आया। फिर मैंने सोचा शायद वो मुझे पसंद नहीं करती। लेकिन मैं उससे भूल नहीं पा रहा। अगले दिन शनिवार को मेरे ऑफिस की छूती थी और रात को १२ बजे अचानक भाभी कॉल आया। 

भाभी बोलीहेलो, मैं हु मेट्रो वाली

मैंने कहामुझे लगा आप तो भूल ही गए मुझे, क्या हाल चाल है आपके

भाभी ने कहामैं ठीक हु, तुम सुनाओ

मैंने कहाआपकी यादों में खोये हुए है, देखो फिर कब मुलाक़ात होती है

भाभी ने कहाबड़ी रोमांटिक बातें कर रहे हो, शर्म नहीं आती

मैंने कहालगता है आपके पति नहीं करते

भाभी ने कहाहां तुम ऐसा ही समझो

मैंने कहाआई लव यू भाभी

भाभी ने कहापति रहे है मेरे, बाद में कॉल करती हु, बाई

मैं उनसे नाम पूछने वाला था की फ़ोन कट गया। 

अगले दिन सन्डे था और मैं बिलकुल फ्री। सुबह सुबह भाभी की कॉल आयी और मैं यह चीज़ देखकर खुश। 

भाभी ने कहासुनो शाम बजे घर पर आना, एड्रेस मैसेज कर रही हुइतना कहकर उन्होंने फ़ोन रख दिया। मैं तैयार होकर उनके घर की तरफ निकल गयी। उफ़ उन्होंने जो दरवाज़ा खोला और वो लाल मैक्सी क्या गज़ब की लग रही थी। मैं अंदर गया उनका घर तो काफी अछा था। भाभी तुरंत चाय लेकर आयी। मैं चाय पी और तुरंत उठ गया वो मेरी तरफ देखती रह गयी। मैं उनके होटों के करीब गया और उन्हें लगा मैं किश करने जा रहा हु। लेकिन मैं कहाआई लव यू, मैं दिल से मोहब्बत करता हु

भाभी ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मेरे होटों को चूमने लगी। मैंने भी उनकी गांड पर एक हाथ रख दिया और दूसरे हाथ से उनकी चूचियों को मसलने लगा। उनकी चूचियां और गांड एकदम नरम और गोल। ऐसी तो किसी लड़की के हो ही नहीं सकता। मेरे अंदर ऐसा जोश बढ़ गया की मैं उनकी मैक्सी उतार दी और उनकी चूचियों के बीच में किश करने लगा। भाभी धीरे धीरे सिसकियाँ भरने लग गयी। मैं अपनी जीभ से चूचियों के साथ खेल रहा था। भाभी के बदन में अलग सी खुशबू थी। मैं उनकी चूचियों के साथ ऐसा खेल रहा था की बिलकुल लाल हो गयी। उनका बदन बिलकुल गोरा था जिससे मैं काट रहा था। एकदम साफ़ निशान नज़र रहे थे। भाभी बिलकुल मदहोश थी। अब तो मुझे उनकी चुत को एहसास करना था। 

मैंने एक हाथ उनकी चुत पर रखा और उनकी पैंटी गीली हो रखी थी। मैंने एक ही हाथ से उनकी पैंटी को नीचे की तरफ कर दिया। अब मुझे चुत का रस पीना था। भाभी को एकदम सीधा लेता दिया और उनकी चुत को जीब से चाटने लग गया। भाभी बहुत ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ भरने लग गयी, दिख रहा था की कभी यह चुत किसीने चाती नहीं। 

भाभी ने सिसकियाँ भरते हुए कहाआज मुझे सुहागरात का मज़ा लेना ही है

समाज गया की यह बहुत बड़ी चुड़क्कड़ है। उनकी सिसकियाँ तेज़ हो गयी, आआह्हऊहहआईईयाह्हउम्मआहआह्हआआआआ आह्हभाभी को बड़ा मज़ा रहा था। 

अब मैंने अपना लंड लिया और उनकी चुत से रगड़ने लगा, वक़्त गया था की अब चुदाई का वक़्त चूका था। 

मैंने चुत के अंदर अपने लंड घुसाया, कोई धक्का नहीं, सीधा एकदम अंदर। भाभी बहुत ज़ोर से चिलायी क्यूंकि बहुत दिनों से वो चूड़ी नहीं थी। अब मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और काफी ज़ोर ज़ोर से भाभी को पेलने लगा। भाभी को एक नशा सा हो रहा था और साथ में मैं भी मदहोश क्यूंकि हम दोनों ही प्यासे थे। मैं उनके ऊपर लेट गया और चूचियों को मसलने लग गया, ऐसी चूचियां शायद ही किसीकी हो। भाभी ने काफी ज़ोर से मुझे बाहों में भर रखा था। 

कुछ देर बाद मेरे लंड ने पानी छोड़ दिया लेकिन भाभी को कोई होश नहीं। मैं उठा और सारा पानी उनके मुँह के ऊपर गिरा दिया। उनका मुँह मेरे लंड के पानी से बिलकुल गीला हो चूका था। 

दोस्तों भाभी का नाम मैंने अब तक आपको नहीं बताया क्यूंकि मुझे भी काफी देर बाद पता चला। भाभी का नाम अनन्या था और उनके पति का खड़ा नहीं होता था। हम दोनों अब सिर्फ सेक्स के लिए एक दूसरे को नहीं बुलाते, हम दोनों एक दूसरे से बहुत ही मोहब्बत करते है।

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